श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 107-108
 
 
श्लोक  1.2.107-108 
महर्षेर्दर्शनं चैव व्यासस्यामिततेजस:।
तदाज्ञयैकचक्रायां ब्राह्मणस्य निवेशने॥ १०७॥
अज्ञातचर्यया वासो यत्र तेषां प्रकीर्तित:।
बकस्य निधनं चैव नागराणां च विस्मय:॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
इसमें महाप्रतापी महर्षि व्यास की पाण्डवों से भेंट तथा उनकी आज्ञा से एकचक्रा नगरी में एक ब्राह्मण के घर में उनके गुप्त निवास का वर्णन है। वहाँ रहते हुए उन्होंने बकासुर का वध किया, जिससे नगरवासियों को बड़ा आश्चर्य हुआ॥107-108॥
 
It describes the meeting of the immensely illustrious Maharshi Vyasa with the Pandavas and their secret stay at the house of a Brahmin in the city of Ekachakra by his order. While staying there, they killed Bakasura, which greatly surprised the citizens.॥107-108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)