श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 104-106
 
 
श्लोक  1.2.104-106 
विदुरस्य च वाक्येन सुरङ्गोपक्रमक्रिया।
निषाद्या: पञ्चपुत्राया: सुप्ताया जतुवेश्मनि॥ १०४॥
पुरोचनस्य चात्रैव दहनं सम्प्रकीर्तितम्।
पाण्डवानां वने घोरे हिडिम्बायाश्च दर्शनम्॥ १०५॥
तत्रैव च हिडिम्बस्य वधो भीमान्महाबलात्।
घटोत्कचस्य चोत्पत्तिरत्रैव परिकीर्तिता॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
फिर विदुर की सलाह मानकर सुरंग खोदने का कार्य आरम्भ किया गया। उसी लाक्षागृह में अपने पाँचों पुत्रों और पुरोचन के साथ सो रही एक भील स्त्री भी जलकर मर गई - यह सब कथा कही गई है। हिडिम्बवधपर्व में घने वन में भ्रमण करते हुए पाण्डवों की हिडिम्बा से भेंट, महाबली भीमसेन द्वारा हिडिम्बासुर का वध तथा घटोत्कच के जन्म की कथा कही गई है।॥104-106॥
 
Then, following Vidur's advice, the work of digging the tunnel was started. In the same Lakhshagriha, a Bhil woman sleeping with her five sons and Purochana also died by burning - all this story has been told. In the Hidimbavadhaparva, the story of the Pandavas meeting Hidimba while travelling through the dense forest, the killing of Hidimbasur by the mighty Bhimasena and the birth of Ghatotkacha has been told.॥104-106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)