| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा » श्लोक d38-d40 |
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| | | | श्लोक 1.199.d38-d40  | धृतराष्ट्र उवाच
एवं विदुर भद्रं ते यदि जीवन्ति पाण्डवा:।
साध्वाचारा तथा कुन्ती सम्बन्धो द्रुपदेन च॥
अन्ववाये वसोर्जात: प्रकृष्टे मान्यके कुले।
व्रतविद्यातपोवृद्ध: पार्थिवानां धुरन्धर:॥
पुत्राश्चास्य तथा पौत्रा: सर्वे सुचरितव्रता:।
तेषां सम्बन्धिनश्चान्ये बहव: सुमहाबला:॥ ) | | | | | | अनुवाद | | धृतराष्ट्र ने (फिर) कहा- विदुर! यदि ऐसा है, यदि पाण्डव जीवित हैं, तो यह बड़े आनन्द की बात है, आपका कल्याण हो। कुन्ती निश्चय ही अत्यन्त पतिव्रता स्त्री है। द्रुपद के साथ उसका जो सम्बन्ध है, वह हमारे लिए अत्यन्त वांछनीय है। विदुर! राजा द्रुपद का जन्म वसु के कुलीन एवं प्रतिष्ठित कुल में हुआ था। वे व्रत, ज्ञान और तप - इन तीनों में श्रेष्ठ थे। वे राजाओं में श्रेष्ठ हैं। उनके सभी पुत्र और पौत्र भी उत्तम व्रतों का पालन करने वाले हैं। द्रुपद के अन्य अनेक सम्बन्धी भी अत्यन्त पराक्रमी हैं। | | | | Dhritarashtra (again) said— Vidur! If this is the case, if the Pandavas are alive, then it is a matter of great joy, may you be blessed. Kunti is certainly a very pious lady. The relationship she has with Drupada is very desirable for us. Vidur! King Drupada was born in the noble and respectable family of Vasu. He excelled in all three – vows, knowledge and penance. He is the foremost among kings. All his sons and grandsons are also the followers of the best vows. Many other relatives of Drupada are also very powerful. | | ✨ ai-generated | | |
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