श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d37
 
 
श्लोक  1.199.d37 
(एतच्छ्रुत्वा तु वचनं विदुरस्य नराधिप:।
आकारच्छादनार्थं तु दिष्टॺा दिष्टॺेति चाब्रवीत्॥
 
 
अनुवाद
विदुर का यह कथन सुनकर राजा धृतराष्ट्र ने अपना बदला हुआ रूप छिपाने के लिए कहा- 'कैसा सौभाग्य! कैसा सौभाग्य!'
 
Hearing this statement of Vidura, King Dhritarashtra said to hide his changed appearance- 'What a good fortune! What a good fortune!'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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