vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा
»
श्लोक d37
श्लोक
1.199.d37
(एतच्छ्रुत्वा तु वचनं विदुरस्य नराधिप:।
आकारच्छादनार्थं तु दिष्टॺा दिष्टॺेति चाब्रवीत्॥
अनुवाद
विदुर का यह कथन सुनकर राजा धृतराष्ट्र ने अपना बदला हुआ रूप छिपाने के लिए कहा- 'कैसा सौभाग्य! कैसा सौभाग्य!'
Hearing this statement of Vidura, King Dhritarashtra said to hide his changed appearance- 'What a good fortune! What a good fortune!'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×