श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d30
 
 
श्लोक  1.199.d30 
भीमोच्छ्रितमहाचक्रं बृहदट्टालसंवृतम्।
दृढप्राकारनिर्यूहं शतघ्नीजालसंवृतम्॥
 
 
अनुवाद
यहाँ विशाल और भयावह चक्र हैं। विशाल मीनारों की एक पंक्ति इस नगरी को घेरे हुए है। इसकी चारदीवारी और छज्जे मज़बूत हैं। यह नगरी शतघ्नी (तोप) नामक अस्त्र-शस्त्रों के समूह से घिरी हुई है।
 
There are huge and fearsome Chakras here. A row of huge towers surrounds this city. Its boundary walls and balconies are strong. This city is surrounded by a group of weapons called Shataghni (cannon).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)