श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  1.199.d3 
शकुनिरुवाच
कश्चिच्छत्रु: कर्शनीय: पीडनीयस्तथापर:।
उत्सादनीया: कौन्तेया: सर्वे क्षत्रस्य मे मता:॥
 
 
अनुवाद
शकुनि बोले - संसार में कोई न कोई शत्रु ऐसा है जिसे हर प्रकार से निर्बल कर देना चाहिए; कोई ऐसा है जिसे हर समय कष्ट देना चाहिए। किन्तु ये सभी कुंतीपुत्र समस्त क्षत्रियों के लिए समूल नाश करने योग्य हैं। इनके विषय में मेरा यही मत है।
 
Shakuni said – There is some enemy in the world who should be weakened in every way; there is another who should be tormented all the time. But all these sons of Kunti are worth destroying completely for all the Kshatriyas. This is my opinion about them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)