श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d28-d29
 
 
श्लोक  1.199.d28-d29 
गोपुराट्टालकैरुच्चैरुपतल्पशतैरपि ।
गुप्तं पुरवरश्रेष्ठमेतदद्भिश्च संवृतम्॥
तृणधान्येन्धनरसैस्तथा यन्त्रायुधौषधै:।
युक्तं बहुकपाटैश्च द्रव्यागारतुषादिकै:॥
 
 
अनुवाद
यह विशाल नगर गोपुरों, ऊँची मीनारों और सैकड़ों भूमिगत छतों से सुरक्षित है। इसके चारों ओर जल से भरी खाई है। यहाँ घास, चारा, अनाज, ईंधन, रस, मशीनें, अस्त्र-शस्त्र और औषधियाँ आदि प्रचुर मात्रा में हैं। यह नगर अनेक द्वारों, भण्डारों और भूसे आदि से भी परिपूर्ण है।
 
This great city is protected by gopuras, high towers and hundreds of sub-terraces. There is a moat filled with water all around it. There is abundance of grass, fodder, grains, fuel, juice, machines, weapons and medicines etc. This city is also full of many doors, storages and straw etc.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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