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mahabharat 1.199.d25: पाण्डव पुत्र युधिष्ठिर अपने शत्रुओं, मित्रों और सेनाओं को प्रचुर धन देकर उन्हें खरीद लेता है तथा अपनी नींव मजबूत करके शत्रुओं का नाश कर देता है।   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  1.199.d25 
परिक्रीय धनै: शत्रून् मित्राणि च बलानि च।
मूलं च सुदृढं कृत्वा हन्त्यरीन् पाण्डवस्तदा॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव पुत्र युधिष्ठिर अपने शत्रुओं, मित्रों और सेनाओं को प्रचुर धन देकर उन्हें खरीद लेता है तथा अपनी नींव मजबूत करके शत्रुओं का नाश कर देता है।
 
Pandava's son Yudhishthira buys off his enemies, friends and armies by giving them abundant wealth and by strengthening his foundation he destroys his enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)