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mahabharat 1.199.d23-d24: युधिष्ठिर भली-भाँति जानते हैं कि कब स्वाभाविक शक्ति का प्रयोग करना है और कब मित्र व सैन्य शक्ति का। राजा युधिष्ठिर समय आने पर शत्रु को साम, दान, भेद और दण्ड नीति से परास्त करने का प्रयत्न करते हैं, क्रोध से नहीं - ऐसा मेरा मानना ​​है।   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d23-d24
 
 
श्लोक  1.199.d23-d24 
मौलमित्रबलानां च कालज्ञो वै युधिष्ठिर:।
साम्ना दानेन भेदेन दण्डेनेति युधिष्ठिर:॥
अमित्रं यतते जेतुं न रोषेणेति मे मति:॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर भली-भाँति जानते हैं कि कब स्वाभाविक शक्ति का प्रयोग करना है और कब मित्र व सैन्य शक्ति का। राजा युधिष्ठिर समय आने पर शत्रु को साम, दान, भेद और दण्ड नीति से परास्त करने का प्रयत्न करते हैं, क्रोध से नहीं - ऐसा मेरा मानना ​​है।
 
Yudhishthira knows very well when to use natural strength and when to use the strength of friends and military. King Yudhishthira tries to defeat the enemy at the right time through Sama, Daan, Bhed and Danda Niti, not through anger - I believe so.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)