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mahabharat 1.199.d19: लोग केवल भाग्यवश ही उसकी सेवा नहीं करते। अर्जुन अपने प्रयत्नों से प्रजा की इच्छाओं की पूर्ति करते रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  1.199.d19 
न तु केवलदैवेन प्रजा भावेन भेजिरे।
यद् बभूव मन:कान्तं कर्मणा च चकार तत्॥
 
 
अनुवाद
लोग केवल भाग्यवश ही उसकी सेवा नहीं करते। अर्जुन अपने प्रयत्नों से प्रजा की इच्छाओं की पूर्ति करते रहते हैं।
 
The people do not serve him only due to destiny. Arjuna keeps fulfilling the desires of his people through his efforts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)