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mahabharat 1.199.d18: अर्जुन अपने शरीर के आकार से (सभी) मनुष्यों के नेत्रों और हृदयों को आनन्द प्रदान करते हैं और अपनी मधुर वाणी से सबके कानों को सुख पहुँचाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d18
 
 
श्लोक  1.199.d18 
वपुषा हि तु भूतानां नेत्राणि हृदयानि च।
श्रोत्रं मधुरया वाचा रमयत्यर्जुनो नृणाम्॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन अपने शरीर के आकार से (सभी) मनुष्यों के नेत्रों और हृदयों को आनन्द प्रदान करते हैं और अपनी मधुर वाणी से सबके कानों को सुख पहुँचाते हैं।
 
Arjuna provides joy to the eyes and hearts of (all) human beings with the shape of his body and brings pleasure to the ears of all with his sweet speech.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)