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mahabharat 1.199.d17: इस दृष्टि से देखें तो मैं पांडवों को मित्र और धन, दोनों से संपन्न मानता हूँ। वे न केवल बलवान हैं, बल्कि वीर भी हैं और अपने सत्कर्मों के कारण सभी लोगों के प्रिय हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  1.199.d17 
ततोऽहं पाण्डवान् मन्ये मित्रकोशसमन्वितान्।
बलस्थान् विक्रमस्थांश्च स्वकृतै: प्रकृतिप्रियान्॥
 
 
अनुवाद
इस दृष्टि से देखें तो मैं पांडवों को मित्र और धन, दोनों से संपन्न मानता हूँ। वे न केवल बलवान हैं, बल्कि वीर भी हैं और अपने सत्कर्मों के कारण सभी लोगों के प्रिय हैं।
 
Looking at it from this perspective, I consider the Pandavas to be blessed with both friends and treasure. They are not only strong but also valiant and are being loved by all the people through their good deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)