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mahabharat 1.199.d16: स्थान, वृद्धि, अवनति, भूमि, मित्र और साहस पर दृष्टि रखते हुए शत्रु पर तभी आक्रमण करना चाहिए जब वह संकट में हो।   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  1.199.d16 
स्थानं वृद्धिं क्षयं चैव भूमिं मित्राणि विक्रमम्।
समीक्ष्याथाभियुञ्जीत परं व्यसनपीडितम्॥
 
 
अनुवाद
स्थान, वृद्धि, अवनति, भूमि, मित्र और साहस पर दृष्टि रखते हुए शत्रु पर तभी आक्रमण करना चाहिए जब वह संकट में हो।
 
Keeping an eye on place, growth, decline, land, friends and courage, one should attack the enemy only if he is in trouble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)