श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  1.199.d15 
सौमदत्तिरुवाच
प्रकृती: सप्त वै ज्ञात्वा आत्मनश्च परस्य च।
तथा देशं च कालं च षड्‍‍विधांश्च नयेद् गुणान्॥
 
 
अनुवाद
भूरिश्रवा ने कहा - अपने पक्ष तथा शत्रु पक्ष के सातों स्वभावों को भली-भाँति जानकर, देश और काल का ज्ञान ध्यान में रखते हुए, आवश्यकतानुसार छह प्रकार के गुणों का प्रयोग करना चाहिए।
 
Bhurishrava said - After knowing all the seven natures of one's own side as well as the enemy's side properly, keeping in mind the knowledge of place and time, one should use the six types of qualities as and when required.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)