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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा
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श्लोक d14
श्लोक
1.199.d14
वैशम्पायन उवाच
शकुनेर्वचनं श्रुत्वा भाषमाणस्य दुर्मते:।
सौमदत्तिरिदं वाक्यं जगाद परमं तत:॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - मूर्ख शकुनिक का यह प्रस्ताव सुनकर सोमदत्त कुमार भूरिश्रवाण ने यह उत्तम बात कही।
Vaishampayanji says - Hearing this proposal of foolish Shakunika, Somdutt Kumar Bhurishravane said this excellent thing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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