Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.199.9-10: द्रुपदकुमारी श्रीकृष्ण ने श्वेतवर्णी अर्जुन को (माला पहनाकर) वरण किया है, यह देखकर राजा दुर्योधन को बड़ा दुःख हुआ। वह अश्वत्थामा, मामा शकुनि, कर्ण, कृपाचार्य तथा अपने भाइयों के साथ (द्रुपद की राजधानी से) हस्तिनापुर लौट आया। मार्ग में दु:शासन लज्जित हुआ और उसने दुर्योधन से धीरे से (इस प्रकार) कहा - 9-10॥ | mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रुपदकुमारी श्रीकृष्ण ने श्वेतवर्णी अर्जुन को (माला पहनाकर) वरण किया है, यह देखकर राजा दुर्योधन को बड़ा दुःख हुआ। वह अश्वत्थामा, मामा शकुनि, कर्ण, कृपाचार्य तथा अपने भाइयों के साथ (द्रुपद की राजधानी से) हस्तिनापुर लौट आया। मार्ग में दु:शासन लज्जित हुआ और उसने दुर्योधन से धीरे से (इस प्रकार) कहा - 9-10॥
King Duryodhana felt very sad after seeing with his own eyes that Drupadakumari Krishna had chosen the white-carved Arjuna (by garlanding him). He returned to Hastinapur (from the capital of Drupada) along with Ashwatthama, maternal uncle Shakuni, Karna, Kripacharya and his brothers. On the way, Dushasana felt ashamed and slowly said to Duryodhana (thus) - 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥