श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.199.5 
ब्रह्मरूपधराञ्छ्रुत्वा प्रशान्तान् पाण्डुनन्दनान्।
कौन्तेयान् मनुजेन्द्राणां विस्मय: समजायत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ आये राजाओं को यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि ब्राह्मण के वेश में शान्त बैठे हुए वह वीर पुरुष वास्तव में कुन्तीपुत्र पाण्डव थे।
 
The kings who had come there were very surprised to hear that the valiant man sitting calmly in the guise of a Brahmin was in fact the Pandava, the son of Kunti.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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