Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.199.31: 'हमें विचार करके निश्चय करना होगा कि वर्तमान परिस्थिति में हमें क्या करना चाहिए, जिससे पाण्डव हमारे पुत्रों, सम्बन्धियों और सेना सहित हमारा विनाश न कर दें।'॥31॥ | mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते वयं प्राप्तकालस्य चिकीर्षां मन्त्रयामहे।
यथा नो न ग्रसेयुस्ते सपुत्रबलबान्धवान्॥ ३१॥
अनुवाद
'हमें विचार करके निश्चय करना होगा कि वर्तमान परिस्थिति में हमें क्या करना चाहिए, जिससे पाण्डव हमारे पुत्रों, सम्बन्धियों और सेना सहित हमारा विनाश न कर दें।'॥31॥
'We have to think and decide what we should do in the present situation, so that the Pandavas do not destroy us along with our sons, relatives and army.'॥ 31॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि विदुरागमनराज्यलम्भपर्वणि दुर्योधनवाक्ये नवनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत विदुरागमन-राज्यलम्भपर्वमें दुर्योधनवचनविषयक एक सौ निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९९॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३९ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७० १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥