| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा » श्लोक 3-4 |
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| | | | श्लोक 1.199.3-4  | य: शल्यं मद्रराजं वै प्रोत्क्षिप्यापातयद् बली।
त्रासयामास संक्रुद्धो वृक्षेण पुरुषान् रणे॥ ३॥
न चास्य सम्भ्रम: कश्चिदासीत् तत्र महात्मन:।
स भीमो भीमसंस्पर्श: शत्रुसेनाङ्गपातन:॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | वह महाबली योद्धा जिसने अत्यन्त क्रोध में आकर मद्रराज शल्य को उठाकर भूमि पर पटक दिया था, तथा जिसने हाथ में वृक्ष लेकर युद्धस्थल में समस्त योद्धाओं को भयभीत कर दिया था, तथा जो उस समय तनिक भी भयभीत नहीं हुआ था, वही महाबली भीमसेन था, जिसने शत्रु सेना के हाथी, घोड़े आदि को मार डाला था, तथा स्पर्शमात्र से ही भय उत्पन्न कर दिया था। | | | | The powerful warrior who in great anger had lifted the Madra king Shalya and thrown him on the ground and who with a tree in his hand had frightened all the warriors on the battlefield and that extremely powerful warrior who was not at all frightened at that time, was the mighty Bhimasena who had killed the elephants, horses etc. of the enemy army and instilled fear with just a touch. | | ✨ ai-generated | | |
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