Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.199.26: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! ऐसी बात कहने वाले राजा धृतराष्ट्र से विदुरजी बोले - ‘महाराज ! आपकी बुद्धि सौ वर्षों तक ऐसी ही बनी रहे ।’ हे राजन ! ऐसा कहकर विदुरजी अपने घर चले गए ॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.199.26 
वैशम्पायन उवाच
तं तथा भाषमाणं तु विदुर: प्रत्यभाषत।
नित्यं भवतु ते बुद्धिरेषा राजञ्छतं समा:।
इत्युक्त्वा प्रययौ राजन् विदुर: स्वं निवेशनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! ऐसी बात कहने वाले राजा धृतराष्ट्र से विदुरजी बोले - ‘महाराज ! आपकी बुद्धि सौ वर्षों तक ऐसी ही बनी रहे ।’ हे राजन ! ऐसा कहकर विदुरजी अपने घर चले गए ॥ 26॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Vidur spoke to king Dhritarashtra who had said such things - 'Maharaj! May your wisdom remain like this for a hundred years.' O King! Having said this, Vidur went back to his home.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)