श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.199.23 
यथैव पाण्डो: पुत्रास्तु तथैवाभ्यधिका मम।
यथा चाभ्यधिका बुद्धिर्मम तान् प्रति तच्छृणु॥ २३॥
 
 
अनुवाद
विदुर! जैसे युधिष्ठिर आदि पाण्डु के पुत्र हैं, वैसे ही वे मेरे भी उतने ही या उससे भी अधिक हैं। मैं उनमें अधिक आसक्त क्यों हूँ? मैं तुमसे कहता हूँ; सुनो॥ 23॥
 
Vidur! Just as Yudhishthira and others are sons of Pandu, they are mine as much or even more. Why do I feel more attached to them? I will tell you; listen.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)