श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.199.18 
वैचित्रवीर्यस्तु वचो निशम्य विदुरस्य तत्।
अब्रवीत् परमप्रीतो दिष्टॺा दिष्टॺेति भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भरत! विदुर के ये वचन सुनकर विचित्रवीर्य के पुत्र राजा धृतराष्ट्र अत्यन्त प्रसन्न हुए और सहसा बोले - 'कैसा सौभाग्य है, कैसा सौभाग्य है!'॥18॥
 
Bharata! On hearing these words of Vidura, King Dhritarashtra, the son of Vichitravirya, became very happy and suddenly said - 'What a good fortune, what a good fortune!'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)