Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.199.16-17: जब विदुरजी ने सुना कि पाण्डवों को द्रौपदी मिल गई है और धृतराष्ट्र के पुत्र अपना अभिमान चूर-चूर होकर लज्जित होकर लौट आए हैं, तब वे मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए। हे राजन! फिर वे धृतराष्ट्र के पास गए और विस्मययुक्त स्वर में बोले - 'महाराज! यह हमारा सौभाग्य है कि कौरव वंश बढ़ रहा है।' 16-17. | mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब विदुरजी ने सुना कि पाण्डवों को द्रौपदी मिल गई है और धृतराष्ट्र के पुत्र अपना अभिमान चूर-चूर होकर लज्जित होकर लौट आए हैं, तब वे मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए। हे राजन! फिर वे धृतराष्ट्र के पास गए और विस्मययुक्त स्वर में बोले - 'महाराज! यह हमारा सौभाग्य है कि कौरव वंश बढ़ रहा है।' 16-17.
When Vidurji heard that the Pandavas have got Draupadi and that the sons of Dhritarashtra have returned ashamed as their pride has been shattered, he became very happy in his heart. O King! Then he went to Dhritarashtra and said in an astonished voice - 'Maharaj! It is our good fortune that the Kaurava dynasty is increasing. 16-17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥