Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.199.14-15: कौरवों ने जब अपनी आँखों से देखा कि महापराक्रमी कुन्तीपुत्र लाक्षागृह की अग्नि से बचकर राजा द्रुपद का सम्बन्धी बन गया है, तब वे अत्यन्त भयभीत हो गए। उन्हें यह भी ज्ञात हुआ कि धृष्टद्युम्न, शिखण्डी आदि द्रुपद के पुत्र समस्त युद्धकलाओं में निपुण हैं। उनकी आशाएँ निराशा में बदल गईं॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 1.199: पाण्डवोंके विवाहसे दुर्योधन आदिकी चिन्ता, धृतराष्ट्रका पाण्डवोंके प्रति प्रेमका दिखावा और दुर्योधनकी कुमन्त्रणा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कौरवों ने जब अपनी आँखों से देखा कि महापराक्रमी कुन्तीपुत्र लाक्षागृह की अग्नि से बचकर राजा द्रुपद का सम्बन्धी बन गया है, तब वे अत्यन्त भयभीत हो गए। उन्हें यह भी ज्ञात हुआ कि धृष्टद्युम्न, शिखण्डी आदि द्रुपद के पुत्र समस्त युद्धकलाओं में निपुण हैं। उनकी आशाएँ निराशा में बदल गईं॥14-15॥
The Kauravas were very frightened when they saw with their own eyes that the son of Kunti, who was very powerful, had survived the fire of Lakshagruha and had become a relative of King Drupada. They also realized that Dhrishtadyumna, Shikhandi and other sons of Drupada were proficient in all the arts of war. Their hopes turned into despair.॥14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥