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यद्यसौ ब्राह्मणो न स्याद् विन्देत द्रौपदीं न स:।
न हि तं तत्त्वतो राजन् वेद कश्चिद् धनंजयम्॥ ११॥
अनुवाद
'भैयाजी! यदि अर्जुन ब्राह्मण के वेश में न होता, तो वह द्रौपदी को कभी प्राप्त न कर पाता। महाराज! वास्तव में तो किसी को पता ही नहीं था कि वह अर्जुन है।'
‘Bhaiji! If Arjuna was not in the guise of a Brahmin, he would never have been able to get Draupadi. King! In reality, no one even knew that he was Arjuna. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥