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mahabharat 1.198.8: ‘अपने घर आनेवाले अतिथियों, साधुओं, वृद्धजनों, बालकों और गुरुजनों का आदर करने में तुम्हें प्रत्येक वर्ष व्यतीत करना चाहिए।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.198: कुन्तीका द्रौपदीको उपदेश और आशीर्वाद तथा भगवान् श्रीकृष्णका पाण्डवोंके लिये उपहार भेजना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 198: कुन्तीका द्रौपदीको उपदेश और आशीर्वाद तथा भगवान् श्रीकृष्णका पाण्डवोंके लिये उपहार भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.198.8 
अतिथीनागतान् साधून् वृद्धान् बालांस्तथा गुरून्।
पूजयन्त्या यथान्यायं शश्वद् गच्छन्तु ते समा:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘अपने घर आनेवाले अतिथियों, साधुओं, वृद्धजनों, बालकों और गुरुजनों का आदर करने में तुम्हें प्रत्येक वर्ष व्यतीत करना चाहिए।॥8॥
 
‘You should spend each year in giving due respect to the guests, saints, elders, children and teachers who come to your home.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)