Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.198.1: वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! पाण्डवों से सम्बन्ध स्थापित करने के बाद राजा द्रुपद को देवताओं से भी भय नहीं रहा, फिर मनुष्यों से उन्हें भय कैसे हो सकता है?' | mahabharat अध्याय 1.198: कुन्तीका द्रौपदीको उपदेश और आशीर्वाद तथा भगवान् श्रीकृष्णका पाण्डवोंके लिये उपहार भेजना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! पाण्डवों से सम्बन्ध स्थापित करने के बाद राजा द्रुपद को देवताओं से भी भय नहीं रहा, फिर मनुष्यों से उन्हें भय कैसे हो सकता है?'
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! After establishing relations with the Pandavas, King Drupada had no fear even from the gods, so how could he have any fear from humans?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥