Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.197.d1: महाराज! द्रौपदी के अच्छे आचरण, एकाग्रता और उत्तम आचरण से सभी पांडव बहुत संतुष्ट थे (और द्रौपदी को प्रसन्न रखने का भी प्रयत्न करते थे)। इसी प्रकार द्रुपदपुत्री कृष्णा ने भी उस समय अपने उत्तम नियमों से पांडवों का सुख बढ़ाया था। | mahabharat अध्याय 1.197: द्रौपदीका पाँचों पाण्डवोंके साथ विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! द्रौपदी के अच्छे आचरण, एकाग्रता और उत्तम आचरण से सभी पांडव बहुत संतुष्ट थे (और द्रौपदी को प्रसन्न रखने का भी प्रयत्न करते थे)। इसी प्रकार द्रुपदपुत्री कृष्णा ने भी उस समय अपने उत्तम नियमों से पांडवों का सुख बढ़ाया था।
King! All the Pandavas were very satisfied with Draupadi's good behaviour, concentration and good conduct (and tried to keep Draupadi happy too). Similarly, Drupada's daughter Krishna also increased the happiness of the Pandavas at that time with her good rules.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि वैवाहिकपर्वणि द्रौपदीविवाहे सप्तनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत वैवाहिकपर्वमें द्रौपदीविवाहविषयक एक सौ सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९७॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल १९ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥