Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.197.4: यदि स्वयं शंकर ने ऐसा आदेश दिया है, तो चाहे वह धर्म हो या अधर्म, मैं इसमें दोषी नहीं हूँ। पाण्डवों को नियमानुसार प्रसन्नतापूर्वक उससे विवाह करना चाहिए; विधाता ने स्वयं कृष्णा को पाण्डवों की पत्नी बनाया है॥4॥ | mahabharat अध्याय 1.197: द्रौपदीका पाँचों पाण्डवोंके साथ विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि चैवं विहित: शंकरेण
धर्मोऽधर्मो वा नात्र ममापराध:।
गृह्णन्त्विमे विधिवत् पाणिमस्या
यथोपजोषं विहितैषां हि कृष्णा॥ ४॥
अनुवाद
यदि स्वयं शंकर ने ऐसा आदेश दिया है, तो चाहे वह धर्म हो या अधर्म, मैं इसमें दोषी नहीं हूँ। पाण्डवों को नियमानुसार प्रसन्नतापूर्वक उससे विवाह करना चाहिए; विधाता ने स्वयं कृष्णा को पाण्डवों की पत्नी बनाया है॥4॥
If Shankar himself has decreed this, then whether it is Dharma or Adharma, I am not guilty of this. The Pandavas should happily marry her as per the rules; the creator himself has made Krishna the wife of the Pandavas. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥