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mahabharat 1.197.15: विवाह समारोह समाप्त होने के बाद, द्रुपद ने पराक्रमी पांडवों को दहेज के रूप में बहुत सारा धन और नाना प्रकार की उत्तम वस्तुएँ भेंट कीं। उन्होंने उन्हें सुंदर स्वर्ण मालाओं और स्वर्ण जूए से सुसज्जित सौ रथ भेंट किए, जिनमें से प्रत्येक को चार घोड़े खींच रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 1.197: द्रौपदीका पाँचों पाण्डवोंके साथ विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 197: द्रौपदीका पाँचों पाण्डवोंके साथ विवाह  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.197.15 
कृते विवाहे द्रुपदो धनं ददौ
महारथेभ्यो बहुरूपमुत्तमम्।
शतं रथानां वरहेममालिनां
चतुर्युजां हेमखलीनमालिनाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
विवाह समारोह समाप्त होने के बाद, द्रुपद ने पराक्रमी पांडवों को दहेज के रूप में बहुत सारा धन और नाना प्रकार की उत्तम वस्तुएँ भेंट कीं। उन्होंने उन्हें सुंदर स्वर्ण मालाओं और स्वर्ण जूए से सुसज्जित सौ रथ भेंट किए, जिनमें से प्रत्येक को चार घोड़े खींच रहे थे।
 
After the wedding ceremony was over, Drupada presented the mighty Pandavas with a lot of wealth and various kinds of fine goods as dowry. He presented them with a hundred chariots adorned with beautiful golden garlands and golden yoke, each drawn by four horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)