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mahabharat 1.197.11: तत्पश्चात् वेदों के मर्मज्ञ और मन्त्रज्ञ पुरोहित धौम्य ने (वेदी पर) अग्नि स्थापित करके उसमें मन्त्रों द्वारा आहुति दी और युधिष्ठिर को बुलाकर कृष्ण के साथ उनका गठबंधन कराया॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.197: द्रौपदीका पाँचों पाण्डवोंके साथ विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 197: द्रौपदीका पाँचों पाण्डवोंके साथ विवाह  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.197.11 
तत: समाधाय स वेदपारगो
जुहाव मन्त्रैर्ज्वलितं हुताशनम्।
युधिष्ठिरं चाप्युपनीय मन्त्रवि-
न्नियोजयामास सहैव कृष्णया॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वेदों के मर्मज्ञ और मन्त्रज्ञ पुरोहित धौम्य ने (वेदी पर) अग्नि स्थापित करके उसमें मन्त्रों द्वारा आहुति दी और युधिष्ठिर को बुलाकर कृष्ण के साथ उनका गठबंधन कराया॥11॥
 
Thereafter, priest Dhaumya, an adept scholar of the Vedas and a mantra expert, established a lit fire (on the altar) and performed oblations in it through mantras and called Yudhishthira and made his alliance with Krishna. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)