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mahabharat 1.196.53: महाराज द्रुपद! देवताओं द्वारा सेवित यह सुन्दरी देवी अपने ही कर्मों से पाँच पुरुषों की पत्नी बनने के लिए नियत हुई है। स्वयं ब्रह्मा ने इसे दिव्य पाण्डवों की पत्नी होने के लिए उत्पन्न किया है। यह सब सुनकर आप जो चाहें करें॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.196.53 
सैषा देवी रुचिरा देवजुष्टा
पञ्चानामेका स्वकृतेनेह कर्मणा।
सृष्टा स्वयं देवपत्नी स्वयम्भुवा
श्रुत्वा राजन् द्रुपदेष्टं कुरुष्व॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
महाराज द्रुपद! देवताओं द्वारा सेवित यह सुन्दरी देवी अपने ही कर्मों से पाँच पुरुषों की पत्नी बनने के लिए नियत हुई है। स्वयं ब्रह्मा ने इसे दिव्य पाण्डवों की पत्नी होने के लिए उत्पन्न किया है। यह सब सुनकर आप जो चाहें करें॥ 53॥
 
Maharaja Drupada! This beautiful goddess who is served by the gods has been destined to be the wife of five men by her own deeds. Brahma himself has created her to be the wife of the divine Pandavas. After hearing all this, do whatever you like. ॥ 53॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि वैवाहिकपर्वणि पञ्चेन्द्रोपाख्याने षण्णवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत वैवाहिकपर्वमें पाँच इन्द्रोंके उपाख्यानका वर्णन करनेवाला एक सौ छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)