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mahabharat 1.196.52: वह स्वर्ग से आई हुई देवी लक्ष्मी हैं, जो पाण्डवों के लिए आपके महान यज्ञ में प्रकट हुई हैं। उन्होंने घोर तपस्या की है और इस जन्म में आपकी पुत्री होने का सौभाग्य प्राप्त किया है। ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.196.52 
स्वर्गश्री: पाण्डवार्थं तु समुत्पन्ना महामखे।
सेह तप्त्वा तपो घोरं दुहितृत्वं तवागता॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वह स्वर्ग से आई हुई देवी लक्ष्मी हैं, जो पाण्डवों के लिए आपके महान यज्ञ में प्रकट हुई हैं। उन्होंने घोर तपस्या की है और इस जन्म में आपकी पुत्री होने का सौभाग्य प्राप्त किया है। ॥52॥
 
She is the goddess Lakshmi from heaven who has appeared in your great sacrifice for the Pandavas. She has performed severe penance and has achieved the good fortune of being your daughter in this birth. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)