Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.51: द्रुपद! उसी ऋषि की कन्या ने आपकी इस दिव्य पुत्री के रूप में पुनः जन्म लिया है। अतः पृषत् कुल की यह पतिव्रता कन्या कृष्णा पहले ही पाँच पतियों की पत्नी बनने के लिए नियत हो चुकी है ॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रुपदैषा हि सा जज्ञे सुता वै देवरूपिणी।
पञ्चानां विहिता पत्नी कृष्णा पार्षत्यनिन्दिता॥ ५१॥
अनुवाद
द्रुपद! उसी ऋषि की कन्या ने आपकी इस दिव्य पुत्री के रूप में पुनः जन्म लिया है। अतः पृषत् कुल की यह पतिव्रता कन्या कृष्णा पहले ही पाँच पतियों की पत्नी बनने के लिए नियत हो चुकी है ॥ 51॥
Drupada! The same sage's daughter has been born again in the form of this divine daughter of yours. Hence, this chaste daughter of the Prishat clan, Krishna, has already been destined to be the wife of five husbands. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥