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mahabharat 1.196.5: ब्रह्माजी बोले- तुम मनुष्यों से क्यों डरते हो? जब तुम सभी अमर हो, तो तुम्हें नश्वर मनुष्यों से कभी नहीं डरना चाहिए॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.196.5 
पितामह उवाच
किं वो भयं मानुषेभ्यो यूयं सर्वे यदामरा:।
मा वो मर्त्यसकाशाद् वै भयं भवितुमर्हति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले- तुम मनुष्यों से क्यों डरते हो? जब तुम सभी अमर हो, तो तुम्हें नश्वर मनुष्यों से कभी नहीं डरना चाहिए॥5॥
 
Brahmaji said- Why are you afraid of humans? Since all of you are immortal, then you should never be afraid of mortal humans. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)