Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.49-50: तब परमेश्वर महादेवजी ने हृदय में अत्यन्त संतुष्ट होकर उससे ये शुभ वचन कहे - 'हे देवी! तुमने 'मुझे पति दो' वाक्य पाँच बार दोहराया है; अतः जो कुछ मैंने पहले कहा है, वह सब घटित होगा, तुम धन्य हो। किन्तु यह सब तब होगा, जब तुम दूसरे शरीर में प्रवेश करोगी।' | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब परमेश्वर महादेवजी ने हृदय में अत्यन्त संतुष्ट होकर उससे ये शुभ वचन कहे - 'हे देवी! तुमने 'मुझे पति दो' वाक्य पाँच बार दोहराया है; अतः जो कुछ मैंने पहले कहा है, वह सब घटित होगा, तुम धन्य हो। किन्तु यह सब तब होगा, जब तुम दूसरे शरीर में प्रवेश करोगी।'
Then the Supreme God Mahadevji, being very satisfied in his heart, said these auspicious words to her - 'Good lady! You have repeated the sentence 'Give me a husband' five times; therefore whatever I have said earlier will happen, may you be blessed. But all this will happen when you enter another body.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥