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mahabharat 1.196.48: यह सुनकर उसने महादेवजी को प्रसन्न करने के लिए पुनः यह कहा - 'हे शंकर! मैं आपसे केवल एक ही गुणवान पति प्राप्त करना चाहती हूँ।'॥48॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.196.48 
सा प्रसादयती देवमिदं भूयोऽभ्यभाषत।
एकं पतिं गुणोपेतं त्वत्तोऽर्हामीति शंकर॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर उसने महादेवजी को प्रसन्न करने के लिए पुनः यह कहा - 'हे शंकर! मैं आपसे केवल एक ही गुणवान पति प्राप्त करना चाहती हूँ।'॥48॥
 
On hearing this, she again said this to please Lord Mahadeva - 'Lord Shankar! I wish to get only one virtuous husband from you.'॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)