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mahabharat 1.196.47: देवेश्वर भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उसे वर दिया और कहा - 'भद्रे! तुम्हारे पाँच पति होंगे'॥47॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.196.47 
ददौ तस्यै स देवेशस्तं वरं प्रीतमानस:।
पञ्च ते पतयो भद्रे भविष्यन्तीति शंकर:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
देवेश्वर भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उसे वर दिया और कहा - 'भद्रे! तुम्हारे पाँच पति होंगे'॥47॥
 
Deveshwar Lord Shankar became happy and gave him the boon and said - 'Bhadre! You will have five husbands'. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)