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mahabharat 1.196.45: उसने कठोर तप करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया; महादेवजी प्रसन्न होकर साक्षात् प्रकट हुए और ऋषि तथा कन्या से कहा - 'मनचाहा वर मांगो' ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.196.45 
तोषयामास तपसा सा किलोग्रेण शंकरम्।
तामुवाचेश्वर: प्रीतो वृणु काममिति स्वयम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उसने कठोर तप करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया; महादेवजी प्रसन्न होकर साक्षात् प्रकट हुए और ऋषि तथा कन्या से कहा - 'मनचाहा वर मांगो' ॥45॥
 
He satisfied Lord Shankar by performing rigorous penance; Mahadevji was pleased and appeared in person and said to the sage and the girl - 'Ask for the desired groom'. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)