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व्यास उवाच
आसीत् तपोवने काचिदृषे: कन्या महात्मन:।
नाध्यगच्छत् पतिं सा तु कन्या रूपवती सती॥ ४४॥
अनुवाद
व्यास जी बोले, "हे राजन! (अपनी पुत्री के दूसरे जन्म की कथा सुनिए।) एक आश्रम में एक महर्षि की पुत्री रहती थी। गुणवान और सुन्दर होने पर भी उसे योग्य वर नहीं मिला।
Vyasa said, "O King! (Listen to the story of another birth of your daughter.) In a hermitage, there lived a daughter of a great sage. In spite of being virtuous and beautiful, she did not get a suitable husband.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥