Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.43: यह महान आश्चर्य देखकर द्रुपद ने सत्यवतीनन्दन व्यासजी के चरण पकड़ लिए और प्रसन्नचित्त होकर उनसे बोले - ‘महर्षि! आपके पास ऐसी अद्भुत शक्ति है, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।’ तब व्यासजी ने प्रसन्न होकर द्रुपद से कहा॥43॥ | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तद् दृष्ट्वा महदाश्चर्यरूपं
जग्राह पादौ सत्यवत्या: सुतस्य।
नैतच्चित्रं परमर्षे त्वयीति
प्रसन्नचेता: स उवाच चैनम्॥ ४३॥
अनुवाद
यह महान आश्चर्य देखकर द्रुपद ने सत्यवतीनन्दन व्यासजी के चरण पकड़ लिए और प्रसन्नचित्त होकर उनसे बोले - ‘महर्षि! आपके पास ऐसी अद्भुत शक्ति है, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।’ तब व्यासजी ने प्रसन्न होकर द्रुपद से कहा॥43॥
Seeing this great surprise, Drupada caught hold of the feet of Satyavatinandan Vyasji and in a happy mood said to him - 'Maharshe! It is not surprising that you have such amazing power.' Then Vyasji became happy and said to Drupada. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥