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mahabharat 1.196.42: उस राजर्षि ने भी अपनी पुत्री को अत्यंत सुन्दर, अत्यंत रूपवती और चन्द्रमा तथा अग्नि के समान प्रकाशित होने वाली दिव्य स्त्री के रूप में देखा। उसने यह भी स्वीकार किया कि द्रौपदी रूप, तेज और यश की दृष्टि से उन पाण्डवों की पत्नी बनने के लिए निःसंदेह योग्य है। इससे वह अत्यंत प्रसन्न हुआ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.196.42 
तां चैवाग्रॺां स्त्रियमतिरूपयुक्तां
दिव्यां साक्षात् सोमवह्निप्रकाशाम्।
योग्यां तेषां रूपतेजोयशोभि:
पत्नीं मत्वा हृष्टवान् पार्थिवेन्द्र:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उस राजर्षि ने भी अपनी पुत्री को अत्यंत सुन्दर, अत्यंत रूपवती और चन्द्रमा तथा अग्नि के समान प्रकाशित होने वाली दिव्य स्त्री के रूप में देखा। उसने यह भी स्वीकार किया कि द्रौपदी रूप, तेज और यश की दृष्टि से उन पाण्डवों की पत्नी बनने के लिए निःसंदेह योग्य है। इससे वह अत्यंत प्रसन्न हुआ॥42॥
 
That King of Kings also saw his daughter as the most beautiful, extremely graceful and a divine woman shining like the moon and fire. He also accepted that Draupadi was certainly fit to be the wife of those Pandavas in terms of beauty, brilliance and fame. This made him very happy. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)