Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.40: वे दिव्य स्वच्छ वस्त्रों, उत्तम सुगन्धियों और सुन्दर मालाओं से सुशोभित थे और त्रिनेत्र महादेव, वसुगण, रुद्रगण या आदित्यगण के समान तेजस्वी और सर्वगुण सम्पन्न प्रतीत हो रहे थे॥40॥ | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिव्यैर्वस्त्रैररजोभि: सुगन्धै-
र्माल्यैश्चाग्रॺै: शोभमानानतीव।
साक्षात् त्र्यक्षान् वा वसूंश्चापि रुद्रा-
नादित्यान् वा सर्वगुणोपपन्नान्॥ ४०॥
अनुवाद
वे दिव्य स्वच्छ वस्त्रों, उत्तम सुगन्धियों और सुन्दर मालाओं से सुशोभित थे और त्रिनेत्र महादेव, वसुगण, रुद्रगण या आदित्यगण के समान तेजस्वी और सर्वगुण सम्पन्न प्रतीत हो रहे थे॥40॥
They were adorned with divine clean clothes, exquisite fragrances and beautiful garlands and appeared to be as bright and full of all qualities as the Trinetra Mahadev, Vasugana, Rudragan or Adityagan. 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥