Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.35-36: महाराज! इस प्रकार ये पाण्डव प्रकट हुए हैं, जो पहले इन्द्र थे। यह दिव्य द्रौपदी वही स्वर्ग की लक्ष्मी हैं, जो पहले से ही उनकी पत्नी के रूप में नियुक्त हैं। महाराज! यदि देवताओं ने इस कार्य में सहयोग न किया होता, तो आपके इस यज्ञकर्म द्वारा यज्ञवेदी की भूमि से ऐसी दिव्य स्त्री कैसे प्रकट होती, जिसका स्वरूप सूर्य और चन्द्रमा के समान प्रकाश देने वाला है और जिसकी सुगन्धि मीलों तक फैलती रहती है॥ 35-36॥ | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमेते पाण्डवा: सम्बभूवु-
र्ये ते राजन् पूर्वमिन्द्रा बभूवु:।
लक्ष्मीश्चैषां पूर्वमेवोपदिष्टा
भार्या यैषा द्रौपदी दिव्यरूपा॥ ३५॥
कथं हि स्त्री कर्मणा ते महीतलात्
समुत्तिष्ठेदन्यतो दैवयोगात्।
यस्या रूपं सोमसूर्यप्रकाशं
गन्धश्चास्या: क्रोशमात्रात् प्रवाति॥ ३६॥
अनुवाद
महाराज! इस प्रकार ये पाण्डव प्रकट हुए हैं, जो पहले इन्द्र थे। यह दिव्य द्रौपदी वही स्वर्ग की लक्ष्मी हैं, जो पहले से ही उनकी पत्नी के रूप में नियुक्त हैं। महाराज! यदि देवताओं ने इस कार्य में सहयोग न किया होता, तो आपके इस यज्ञकर्म द्वारा यज्ञवेदी की भूमि से ऐसी दिव्य स्त्री कैसे प्रकट होती, जिसका स्वरूप सूर्य और चन्द्रमा के समान प्रकाश देने वाला है और जिसकी सुगन्धि मीलों तक फैलती रहती है॥ 35-36॥
King! Thus have these Pandavas appeared, who were Indras earlier. This divine Draupadi is the same Lakshmi of heaven, who has already been appointed as their wife. Maharaj! If the gods had not cooperated in this task, then how could such a divine woman have appeared from the land of the sacrificial altar through this yajnakarma of yours, whose form is radiating light like the sun and the moon and whose fragrance keeps spreading for a mile.॥ 35-36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥