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mahabharat 1.196.34: जो चार महाबली पाण्डव इन्द्र के रूप में हिमालय की गुफाओं में बंदी बनाकर रखे गए थे, वे ही यहाँ उपस्थित हैं और जो पाँचवाँ पुरुष साक्षात् इन्द्र के अंशरूप में प्रकट होने वाला था, वह पाण्डुकुमार सव्यसाची अर्जुन है ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.196.34 
ये ते पूर्वं शक्ररूपा निबद्धा-
स्तस्यां दर्यां पर्वतस्योत्तरस्य।
इहैव ते पाण्डवा वीर्यवन्त:
शक्रस्यांश: पाण्डव: सव्यसाची॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जो चार महाबली पाण्डव इन्द्र के रूप में हिमालय की गुफाओं में बंदी बनाकर रखे गए थे, वे ही यहाँ उपस्थित हैं और जो पाँचवाँ पुरुष साक्षात् इन्द्र के अंशरूप में प्रकट होने वाला था, वह पाण्डुकुमार सव्यसाची अर्जुन है ॥34॥
 
The same four mighty Pandavas who were kept captive in the caves of the later Himalayas in the form of Indra, are present here and the fifth man who was about to appear as a part of Indra in person, is Pandukumar Savyasachi Arjun. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)