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mahabharat 1.196.33: वे दोनों बाल यदुवंश की दो स्त्रियों - देवकी और रोहिणी - में प्रविष्ट हो गए। उनमें से रोहिणी के बलदेव प्रकट हुए, जो भगवान नारायण के श्वेत बाल थे; दूसरा बाल, जो श्यामवर्ण का कहा गया है, देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण के रूप में प्रकट हुआ॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.196.33 
तौ चापि केशौ निविशेतां यदूनां
कुले स्त्रियौ देवकीं रोहिणीं च।
तयोरेको बलदेवो बभूव
योऽसौ श्वेतस्तस्य देवस्य केश:।
कृष्णो द्वितीय: केशव: सम्बभूव
केशो योऽसौ वर्णत: कृष्ण उक्त:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों बाल यदुवंश की दो स्त्रियों - देवकी और रोहिणी - में प्रविष्ट हो गए। उनमें से रोहिणी के बलदेव प्रकट हुए, जो भगवान नारायण के श्वेत बाल थे; दूसरा बाल, जो श्यामवर्ण का कहा गया है, देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण के रूप में प्रकट हुआ॥ 33॥
 
Both those hairs entered into two women of Yadu dynasty – Devaki and Rohini. From among them appeared Baldev of Rohini, who was the white hair of Lord Narayana; The second hair, which is said to be dark in colour, appeared in the form of Lord Shri Krishna from the womb of Devaki*॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)