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mahabharat 1.196.31: तत्पश्चात् महादेवजी उनके साथ भगवान नारायण के पास गए, जो सनातन, अचिन्त्य, अव्यक्त, अजन्मा, पुरातन, नित्य, सर्वव्यापक और अनंत थे॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.196.31 
तैरेव सार्धं तु तत: स देवो
जगाम नारायणमप्रमेयम्।
अनन्तमव्यक्तमजं पुराणं
सनातनं विश्वमनन्तरूपम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महादेवजी उनके साथ भगवान नारायण के पास गए, जो सनातन, अचिन्त्य, अव्यक्त, अजन्मा, पुरातन, नित्य, सर्वव्यापक और अनंत थे॥31॥
 
Thereafter, Mahadevji along with him went to Lord Narayana who was eternal, immeasurable, unmanifested, unborn, ancient, eternal, universal and infinite. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)