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mahabharat 1.196.3-4: चन्द्रमा, इन्द्र, वरुण, कुबेर, साध्यगण, रुद्रगण, वसुगण, दोनों अश्विनीकुमार तथा अन्य सभी देवता मिलकर उस स्थान पर गए जहाँ सृष्टिकर्ता प्रजापति ब्रह्माजी रहते थे। वहाँ जाकर सभी देवताओं ने जगतगुरु ब्रह्माजी से कहा - 'प्रभो! मनुष्यों की संख्या बहुत बढ़ रही है। इससे हम लोग बहुत भयभीत हैं। उस भय से हम सब व्याकुल हैं और सुख प्राप्ति की इच्छा से आपकी शरण में आए हैं।'॥3-4॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.196.3-4 
सोमश्च शक्रो वरुण: कुबेर:
साध्या रुद्रा वसवोऽथाश्विनौ च।
प्रजापतिर्भुवनस्य प्रणेता
समाजग्मुस्तत्र देवास्तथान्ये॥ ३॥
ततोऽब्रुवन् लोकगुरुं समेता
भयात् तीव्रान्मानुषाणां च वृद्धॺा।
तस्माद् भयादुद्विजन्त: सुखेप्सव:
प्रयाम सर्वे शरणं भवन्तम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
चन्द्रमा, इन्द्र, वरुण, कुबेर, साध्यगण, रुद्रगण, वसुगण, दोनों अश्विनीकुमार तथा अन्य सभी देवता मिलकर उस स्थान पर गए जहाँ सृष्टिकर्ता प्रजापति ब्रह्माजी रहते थे। वहाँ जाकर सभी देवताओं ने जगतगुरु ब्रह्माजी से कहा - 'प्रभो! मनुष्यों की संख्या बहुत बढ़ रही है। इससे हम लोग बहुत भयभीत हैं। उस भय से हम सब व्याकुल हैं और सुख प्राप्ति की इच्छा से आपकी शरण में आए हैं।'॥3-4॥
 
Chandrama, Indra, Varuna, Kubera, Sadhyagana, Rudragana, Vasugan, both Ashwinikumars and all other gods together went to the place where the creator Prajapati Brahmaji lived. Going there all the gods said to the world's guru Brahmaji - 'Lord! The number of humans is increasing a lot. This scares us a lot. We are all restless due to that fear and have come to your refuge with the desire to attain happiness.'॥ 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)