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mahabharat 1.196.28-29: व्यासजी कहते हैं- राजन! पूर्व इन्द्रों के ये वचन सुनकर वज्रधारी इन्द्र ने देवताओं में श्रेष्ठ महादेवजी से पुनः इस प्रकार कहा - 'प्रभो! मैं अपने वीर्य से उत्पन्न अपने ही अंश पुरुष को देवताओं के कार्य के लिए समर्पित करूँगा, जो इन चारों के साथ पाँचवाँ होगा। मैं स्वयं उसकी रचना करूँगा। विश्वभुक, भूतधाम, तेजस्वी इन्द्र शिबि, चतुर्थ शांति और पाँचवाँ तेजस्वी - ये उन पाँचों के नाम हैं। 28-29॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  1.196.28-29 
व्यास उवाच
एतच्छ्रुत्वा वज्रपाणिर्वचस्तु
देवश्रेष्ठं पुनरेवेदमाह।
वीर्येणाहं पुरुषं कार्यहेतो-
र्दद्यामेषां पञ्चमं मत्प्रसूतम्॥ २८॥
विश्वभुग् भूतधामा च शिबिरिन्द्र: प्रतापवान्।
शान्तिश्चतुर्थस्तेषां वै तेजस्वी पञ्चम: स्मृत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं- राजन! पूर्व इन्द्रों के ये वचन सुनकर वज्रधारी इन्द्र ने देवताओं में श्रेष्ठ महादेवजी से पुनः इस प्रकार कहा - 'प्रभो! मैं अपने वीर्य से उत्पन्न अपने ही अंश पुरुष को देवताओं के कार्य के लिए समर्पित करूँगा, जो इन चारों के साथ पाँचवाँ होगा। मैं स्वयं उसकी रचना करूँगा। विश्वभुक, भूतधाम, तेजस्वी इन्द्र शिबि, चतुर्थ शांति और पाँचवाँ तेजस्वी - ये उन पाँचों के नाम हैं। 28-29॥
 
Vyasji says- Rajan! Hearing these words of the previous Indras, Indra wielding the thunderbolt again said to Mahadevji, the best of the gods, in this manner - 'Lord! I will dedicate my own part-born man from my semen for the work of the gods, who will be the fifth along with these four. I will create it myself. Vishvabhuk, Bhootdhama, glorious Indra Shibi, fourth Shanti and fifth Tejasvi – these are the names of those five. 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)