Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.196.22: पर्वत शिखर पर भगवान रुद्र की यह बात सुनकर इंद्रदेव पराजित होने के भय से अत्यंत दुःखी हो गए, उनके सारे अंग शिथिल हो गए और वे वायु से हिलते हुए पीपल के पत्ते के समान कांपने लगे। | mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पर्वत शिखर पर भगवान रुद्र की यह बात सुनकर इंद्रदेव पराजित होने के भय से अत्यंत दुःखी हो गए, उनके सारे अंग शिथिल हो गए और वे वायु से हिलते हुए पीपल के पत्ते के समान कांपने लगे।
On hearing Lord Rudra say this on the peak of the mountain, Lord Indra became very sad due to the fear of being defeated. All his limbs became weak and he started trembling like a peepal leaf swaying in the wind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥